योगेश कुमार गर्ग
मेरा नाम योगेश कुमार गर्ग है । मैं भरतपुर, राजस्थान का निवासी हूँ । मेरी मुलाकात श्री श्वेताभ भैया जी से फेसबुक के जरिए हुई थी। मैं भैयाजी का फेसबुक फॉलोअर था, इनके जब भी लेख आते थे तो मैं पूरा लेख पढ़ता था। भैयाजी के लेखों को पढ़कर दिल को बहुत अच्छा लगता था। एक दिन जून 2022 में, फेसबुक पर भैया जी ने अध्यात्म से संबंधित एक व्हाट्सएप ग्रुप की लिंक साझा की। उस समूह का नाम ‘अध्यात्म दर्शन’ था जिसे मैंने तुरन्त ज्वाइन कर लिया। इस समूह में अध्यात्म से संबंधित प्रश्नोत्तरी और लेख आने लगे जिनको पढ़ने और समझने के बाद मन में दबी शंकाएं दूर होने लगीं। धीरे-धीरे और ज्यादा जानने की इच्छा जाग्रत होने लगी, अध्यात्म में रुचि बढ़ने लगी। अब तक जिस कर्मकाण्ड में फंसे हुए थे, उनसे धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे। माला करना, मंदिर में जाकर उत्तर दिशा में मुँह करके भोले जी को जल चढ़ाना, हनुमान चालीसा पढ़ना, बिना अर्थ समझे मुँह से वाचन करना, भगवान से यह माँगना, वह माँगना आदि आदि। भैया जी के लेखों को पढ़कर कभी-कभी ऐसा लगता था कि भैया जी एक अवतरित महापुरुष हैं। भैया जी से मिलने की इच्छा प्रबल होने लगी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, भैया जी से मिलने की इच्छा प्रबल होती जा रही थी। फिर एक दिन अप्रैल 2023 में अध्यात्म ग्रुप में साधना शिविर के आयोजन का प्रस्ताव रखा गया। इस शिविर में राधा रानी और ठाकुर जी की कृपा से सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साधना शिविर में 300 साधकों में से केवल 30 से 35 साधक ही आए थे। सबसे मिलकर इतना अपनापन लग रहा था कि जैसे हम सब एक-दूसरे को जाने कब से जानते हैं, कोई अजनबी नहीं लग रहा था।
साधना शिविर में भैया जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भैया जी से मिलने के बाद तो हमारा जीवन ही बदल गया, जीवन को जीने का तरीका समझ में आने लगा। अब तक सिर्फ माला फेरना और मंदिर जाने को ही भक्ति समझ रहे थे लेकिन भैयाजी से मिलकर भक्ति का असली मतलब जाना। भैया जी ने भक्ति को बिल्कुल सहज बना दिया, बिना किसी डर के भक्ति करना सिखा दिया। मुझ जैसे पापी को अगर भैयाजी न मिलते तो हम न जाने कितने जन्म भटकते रहते । भैयाजी ने जीवन जीने की नई दिशा दी, बिल्कुल नया जीवन दिया है। इस साधना शिविर का हिस्सा बनने के बाद ही जान पाए की भगवान क्या और कौन हैं, भगवान को कैसे रिझाया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात, रूपध्यान के बारे में जान पाए जिसके बारे में अभी तक कुछ भी नहीं सुना था। रूपध्यान के बारे में जाना और भगवान से प्रेम करने के बारे में जाना जिसको जानने के बाद भगवान से प्रेम बढ़ने लगा। बहुत कुछ जाना, समझा जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। अब तक तीन साधना शिविर हो चुके हैं और तीनों शिविर में कुछ न कुछ नया अनुभव हुआ है। सच में, अगर हमें भैया जी नहीं मिलते तो न जाने कितने जन्मों तक और भटकते रहते। अब ग्रुप के सभी साधक एक परिवार के सदस्य बन गये हैं जो भी शिविर में आए थे। मेरी सभी साधकों के लिये यही विनती है कि भैया जी का आशीर्वाद और कृपा हमेशा बनी रहे, सभी साधक अपने जिस परम लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं उसे श्री राधारानी जू और हरि-गुरु की कृपा से प्राप्त करें ।
