भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

हिमांशु चौहान

मेरा नाम हिमांशु चौहान है। मैं जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मैं एक अध्यापक हूँ।
मैं श्री श्वेताभ भैया जी से फेसबुक के माध्यम से जुड़ा था। शुरू में भैया जी के फेसबुक लेखों से प्रभावित हुआ था। एक दिन उसी फेसबुक पेज पर एक अध्यात्म से संबंधित समूह के लिए आमंत्रण आया। मन में तो था ही कि काश! कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो सही-सही अध्यात्म संबंधी ज्ञान दे पाए, इसी आशा में उस ग्रुप से जुड़ा था।
प्रारंभ में मुझे नहीं पता था कि इस समूह से जुड़कर क्या मिलने वाला है। धीरे-धीरे समूह के माध्यम से चर्चा प्रारंभ हुई तो समझ आया कि शायद मैं सही हाथों में हूँ। धीरे-धीरे एक वर्ष बीत गया और फिर चर्चा होते-होते एक शिविर के आयोजन पर सहमति बनी। मैंने भी शिविर में आने के लिए सहमति दे दी लेकिन सही कहूँ तो मेरे मन में था कि मैं तो शिव भक्त हूँ, उनसे ही मेरा वास्ता है और ये लोग राधा-कृष्ण वाले हैं, मेरी ज्यादा नहीं बनेगी। ज्ञान की कमी थी तो इस बात से अनभिज्ञ था कि दोनों में कोई भेद नहीं है, दोनों एक ही है।
मैं आधे-अधूरे मन से शिविर में गया या यूँ कहिये कि मुझे प्रभु और गुरुदेव की कृपा ने बुला लिया। शिविर में पहुँच कर पहले दिन ही समझ आ गया कि प्रभु की असीम अनुकंपा हुई है और मैं एक महापुरुष के सान्निध्य में हूँ।
शिविर के बाद तो मेरा जीवन ही बदल चुका है। अब उनके नाम, रूप, गुण, लीला में जो रस मिलने लगा है, उसका वर्णन शब्दों में तो नहीं किया जा सकता, उसको सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। कोई सही-सही तत्वज्ञान और प्रभु प्रेम का रस चखना चाहता है तो विश्वास कीजिए आप बिल्कुल सही जगह हैं।
भज गोविंदं भज गोविंदं, गोविन्दं भज मूढ़मते।