भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

चंद्रशेखर पाठक

जय श्री राधे ।
मेरा नाम चंद्रशेखर पाठक है । मूलरूप से पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड से हूँ। पिताजी आर्मी में थे तो बचपन से हिंदुस्तान में जगह-जगह रहा हूँ। पिछले 23 सालों से जयपुर में सेटल्ड हैं। मैं एक बैंकर हूँ।
भक्ति-भाव, पूजा, बचपन से ही परम्परागत रूप से व्यवहार में थी परंतु विश्वास में कमी थी। श्री गुरुदेव श्वेताभ पाठक जी के सान्निध्य में आने के बाद वह पूरी हो गई। गुरुजी से फेसबुक के माध्यम से मिलना हुआ, इनके लेख सीधा दिल को चीरते हुए निकलते थे। ऐसा लगता था यही तो मैं सोचता हूँ, ऐसा ही तो मैं हूँ। यह कृपा है मेरे प्रभु की जो मैं आप सब के बीच हूँ।
गुरुदेव कृपा बनाए रखना, बरसाना शिविर में नहीं जा पाया l इस बार गोवर्धन शिविर में जा पाया वो भी दो दिन के लिए लेकिन गुरुजी से मिल कर ऐसा लगा कि पता नहीं कितना पुराना नाता है। मैं, गुरुदेव का इतना स्नेह और आशीर्वाद पाकर धन्य हुआ। बहुत सारे पुराने मिथक और भ्रम दूर हुए, अनेक सिद्धांत स्पष्ट हुए। अब आत्मविश्वास का स्तर उच्चतर है। शिविर में आकर ऐसा लगा कि अपने घर पर आया हूँ जहाँ पर आप सभी से इतना प्रेम मिला।