भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

हर्षद वशिष्ठ

जय श्री राधे ।
मेरा नाम हर्षद वशिष्ठ है, मैं पलवल, हरियाणा का निवासी हूँ । पेशे से मैं सनदी लेखाकार (CA) हूँ । बात 2020 की है जब मैंने गुरुजी की फेसबुक पोस्ट देखी, वह आध्यात्मिक लेख था। वह लेख इतना अच्छा लगा कि उस दिन इनकी प्रोफाइल की बहुत सारी पोस्ट पढ़ डालीं। सभी पोस्ट अपने आप में पूर्ण और दिल, दिमाग और मन को झकझोर देने वाली थीं l फिर तो धीरे-धीरे यह आदत होती गई कि गुरुजी की सारी पोस्ट पढ़ता था और कुछ समय बाद सारी पोस्ट शेयर करने लगा । बहुत सी कैटेगरी हैं जिनके ऊपर गुरुजी के लेख हैं जिन पर कोई लिख क्या, सोच भी नहीं पाता लेकिन इन्होंने बेबाकी से बिल्कुल पूर्ण शास्त्र सम्मत लेख लिखे। जैसे- महिला और पुरुष प्रकृति के द्वारा ही समान नहीं हैं, रावण भगवान से बड़ा नहीं, आज की एलोपैथी माफियाओं के बारे में, सीमेंट इंडस्ट्री के बारे में, देसी अन्न, पर्यावरण के बारे में इत्यादि ये तो सामाजिक लेख हो गए। सनातन धर्म के बारे में, मंदिरों के बारे में, संत-महापुरुषों के बारे में एवं उनके पद-भजन, स्वयं गुरुजी के लिखे हुए ऐसे-ऐसे पद हैं जिन्हें कोई महापुरुष ही लिख सकते हैं। गुरुजी ने बेबाकी से शास्त्रसम्मत बातें लोगों को बतायी हैं, फेसबुक और अन्य माध्यमों के द्वारा, बिना इसकी परवाह किए कि लोग उनको कितनी गालियाँ दे रहें हैं। अब ध्यान देने वाली बात यह है कि जब लोग गाली दे रहे हैं तो अवश्य कुछ गलत किया होगा परंतु सच तो ये है कि आजकल कलयुग में लोगो के हृदय और दिमाग़ पर कुछ कथावाचकों ने, आज के तथाकथित नेताओं और अभिनेताओं ने, धारावाहिकों ने, फिल्मों ने, वेबसीरीज ने, विज्ञापनों ने इतना नियंत्रण कर लिया है कि लोगों को अब सही गलत की पहचान ही नहीं रही है। ऐसे लोगों को कोई समझाने वाला भी नहीं हैं, सही-गलत बताने वाला नहीं है।

एक दिन फेसबुक के माध्यम से गुरुजी की कृपा से पता चला कि गुरुजी ने कोई अध्यात्म दर्शन नाम से ग्रुप बनाया है, अध्यात्म और धार्मिक चर्चाओं के लिए। ग्रुप को जॉइन करने की रिक्वेस्ट भेजते ही, मेरा ग्रुप ज्वाइनिंग का निवेदन भी स्वीकार कर लिया गया l फिर शुरू हुई अध्यात्म-दर्शन यात्रा, बहुत कुछ जानने को और समझने को मिला हमें घर बैठे, बहुत सारी गलत धारणाएं टूटी, अंधविश्वास दूर हुए, सनातन धर्म के सभी तीज-त्योहारों, मान्यताओं, भगवान की लीला, नाम, रूप, गुण, धाम, संत-महापुरुषों के बारे में, उनके पद भजन, हरि-गुरु सभी के बारे में इतना कुछ मिला कि जिसकी मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था। ऐसे ही धीरे-धीरे मैं गुरुजी से बहुत प्रभावित होने लगा। गुरुजी ने मुझ पतित की पर्सनल में बात भी सुनी, बिना किसी जान पहचान के मेरे हित के लिए इन्होंने मेरी बहुत मदद की, मुझे सही गलत का बार-बार आभास कराया। इसके बाद आया वो दिन जब शिविर के लिए गुरुजी ने बोला और कहा कि यहाँ सब सैद्धांतिक है, सिद्धांत को व्यवहार में उपयोग के लिए शिविर में आइए। प्रथम शिविर की घोषणा हुई और स्थान रखा गया- वृंदावन। मैं बहुत खुश था कि अब गुरुजी से मिलन होगा, भगवान के बारे में, उनसे प्रेम करने के बारे में जानने को मिलेगा। इसी उत्साह में मैंने भी अपना नाम दे दिया शिविर के लिए। जी हाँ, मैं भी उन सौभाग्यशाली लोगों में से हूँ जिन्हें प्रथम शिविर में हरि-गुरु कृपा से पूरे पाँच दिन शामिल होने का मौका मिला। 29 अप्रैल 2023 को सुबह पाँच बजे गुरुजी के दर्शन हुए तो ऐसा लगा कि इनसे तो जन्म-जन्मांतर का नाता है। शिविर में कभी भी ऐसा नहीं लगा कि मैं कहीं किन्हीं अजनबियों के साथ हूँ। सभी के सभी अपने परिवारजन लगे।

शिविर में जाना कि प्रेम क्या होता है, पद-भजनों को इतने प्रेम से गाया जाता है वो भी पहली बार अनुभव किया। भगवान के नाम, रूप, गुण, लीला, धाम आदि के बारे में गुरुजी के श्री मुखमंडल से रसपान किया। शिविर में सभी लोगों का इतना प्रेम मिला कि जैसे हम सभी पुराने जन्मों के साथी हों। सभी ने कुछ ना कुछ सिखाया। इसके बाद दूसरा और तीसरा शिविर आयोजित हुआ क्रमश: बरसाना धाम और गोवर्धन धाम में। शिविर का समय कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता। बिल्कुल शांति, एक अलग ही आनंद । मैं उन सभी लोगों से कहना चाहता हूँ जो शांति और आनंद की चाह में हिल स्टेशन, पहाड़ों, नदियों, समुद्र किनारे इत्यादि घूमने जाते हैं। एक बार पूर्ण विश्वास के साथ शिविर में आयें और फिर देखें कितना आनंद मिलता है। आप कहीं और घूमना भूल जाएंगे। जब शिविर से विदाई लेकर सब अपने घर जाते हैं तो सभी की आँखो में अपनों से बिछड़ने के अश्रु होते हैं। शिविर के बारे में वही जान सकता है जिसने पूरे पाँचों दिवस तक शिविर अटेंड किया हो l मतलब प्रथम दिन से अंतिम दिवस तक उपस्थित रहें हो । मुझ पतित के अंदर हरि-गुरु की कृपा से इतने बदलाव हुए कि मैं आज ये सोचता हूँ कि यह सब कैसे हुआ । बहुत आश्चर्य होता है आज अपने आप को देखकर।