भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

सोनम कटियार

राधे राधे
मेरा नाम सोनम है। मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से हूँ। मैं एक सरकारी अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। मेरा जन्म आगरा में हुआ था। प्रारम्भ से ही घर में पूजा-पाठ का माहौल होने से पूजा करने की आदत तो बचपन से ही थी लेकिन उसी तरह से जैसे सब करते हैं बस आदत कि हमें करना है। जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आए जैसा कि सभी के जीवन में आते हैं l भगवान का नाम लेते हुए हँसते-रोते सब चलता रहा। मेरे शिव ने हमेशा मेरा दुःख सुना और खुशी में भी शामिल रहे, लेकिन अभी कुछ बाकी था। मन में आस्था तो बहुत थी फिर भी जीवन में शांति का, आनंद का अभाव था जो कहीं भी नहीं मिल रहा था। इतने उतार-चढ़ाव के बाद भी प्रभु के आशीर्वाद से सरकारी नौकरी लग गई। नौकरी लगने के बाद मेरे पति की मुलाकात एक अध्यापक आशुतोष जी से कुछ नौकरी सम्बंधी कार्य की वजह से 2018 में हुई l उसके बाद पता नहीं था कि यह मुलाकात 2023 में, इतने साल बाद मेरे जीवन में ईश्वर से जुड़े सारे प्रश्नों के समाधान पाने में मेरी सहायता करेगी। जून 2023 में आशुतोष जी ने मुझे पूछा कि क्या अध्यात्म में रुचि रखती हो ? मैंने कहा हाँ, तो उन्होंने कहा, “एक अध्यात्म से सम्बंधित समूह में जोड़ रहा हूँ, शांति से ग्रुप में बने रहना और उसके सारे लेख ध्यान से पढ़ना और कोई प्रश्न हो तो पूछना।” मैने हाँ बोला और उन्होंने मुझे समूह में जोड़ दिया। मैंने ग्रुप में आने वाले लेखों को पढ़ना शुरू किया l समूह में जुड़ने के बाद पता चला कि समूह में गुरुजी श्री श्वेताभ पाठक जी हैं जिन्हें सब लोग भैया बोलते हैं। यह एक घंटे का समूह मेरे जीवन का सबसे आनंददायक समय बन गया।

बहुत दिनों से मैं एक ऐसा गुरु चाहती थी जिनका मुझे सान्निध्य सीधे-सीधे मिल सके, जिन तक मुझे जब जरूरत हो तब पहुँच सकूँ। अभी तक मुझे कोई गुरु नहीं मिले थे क्योंकि आजकल के समय में किसी पर विश्वास करना बहुत मुश्किल हो गया है। लेकिन मुझे गुरु की तलाश थी। अध्यात्म दर्शन समूह के माध्यम से मेरी खोज पूरी हुई। जो भी प्रश्नोत्तर ग्रुप में आते, मैं सबको ध्यानपूर्वक पढ़ती थी । समूह में जब प्रश्न आते तो लगता अरे! यह तो मेरा ही प्रश्न है। उन प्रश्नों के उत्तर जितने सरल, सहज होते उतने ही ज्ञानवर्धक भी। गुरुजी से मिलने से पहले ही उनके ज्ञानवर्धक लेख पढ़ते-पढ़ते मैंने उन्हें मन ही मन गुरु रूप में स्वीकार कर लिया था ।गुरुजी की पोस्ट पढ़ने से ही पता चला कि भगवान से डरना नहीं है, सिर्फ प्रेम करना है। ईश्वर कभी किसी का बुरा नहीं करते। भगवान तो केवल प्रेम का विषय हैं, वह सिर्फ प्रेम ही देते हैं कभी दंड नहीं देते। गुरुजी के इस सिद्धांत से मुझे अपने भगवान से अथाह प्रेम होने लगा और डर लगना बन्द हो गया, पूजा-पाठ से जुड़े अनेक भ्रम भी दूर हो गए। यह भी समझ आ गया कि भगवान सिर्फ भाव से ही मिल जाते हैं, उनको हमारे रुपये-पैसे की आवश्यकता नहीं है। इतना बदलाव तो तभी हो गया जब मैं गुरुजी से मिली ही नहीं थी। अभी तो गुरु जी से मिलने का सुखद अनुभव हुआ ही नहीं था । इस बार शिविर का आयोजन गोवर्धन में 24 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच हुआ। यह मेरा पहला शिविर था। गुरुजी से मिलने की बहुत उत्सुकता थी । 24 तारीख को जब मैं सत्संग भवन पहुँची तो वहाँ जाते ही एक अलग सी शांति और सुख का अनुभव हुआ जिसे मैं अभी तक खोज रही थी।

गुरुजी की वाणी इतनी मधुर, लहजा इतना अद्भुत और शांत था कि ऐसा लगा मानो स्वयं ईश्वर मुझसे बात कर रहे हों। गुरुजी तो अब मेरे लिए मेरे प्रभु से भी बढ़कर हैं। हम अज्ञानी लोगों को गुरुजी शास्त्र, वेद, उपनिषद और सभी धार्मिक ग्रंथों का जो सार देते हैं वह अद्वितीय है। हम मूर्खों को सब कुछ समझाने के लिए वह हम जैसे ही बनकर, एकदम हमारे स्तर पर आकर, हमारी भाषा में बहुत प्यार से समझाते हैं। अब तक मुझे लगता था कि मेरे प्रारब्ध बहुत बुरे हैं, लेकिन गुरुजी से मिलने के बाद मेरी सोच बदल गई। मेरे अच्छे प्रारब्ध के फलस्वरूप ही मुझ अधम, अज्ञानी, मूर्ख को ऐसे गुरु मिल गए जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। गुरु जी के सान्निध्य में मनुष्य जीवन मिलने का उद्देश्य स्पष्ट हो गया कि जीवन सिर्फ भगवदप्राप्ति के लिए ही मिला है। साधना, रूपध्यान, हर जगह हर समय ईश्वर को महसूस करना, हर कार्य ईश्वर को समर्पित करते हुए करना; यह सब ज्ञान गुरु जी के सान्निध्य में ही प्राप्त हुआ। ईश्वर स्वयं हर समय हम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते तो वह गुरु के रूप में हमारे मध्य आते हैं। मेरा ये जन्म इस बार व्यर्थ नहीं होगा क्योंकि मुझे ईश्वर रूपी गुरु की प्राप्ति हो गयी है; मैं अत्यंत भाग्यशाली हूँ । अब मुझे अपने गुरुजी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए उनके सान्निध्य में उनके साथ ही गोलोक जाना है बस। गुरु जी अपनी कृपा और सान्निध्य मुझ पर बनाये रखियेगा जिससे मैं भी ईश्वर का प्रेम प्राप्त करके अपने मानव जीवन के उद्देश्य को पूरा कर सकूँ। गुरु जी, आपका हृदय से अनंतकोटि आभार हम सबको अपनाने के लिए और हम पर कृपा बरसाने के लिए।