भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

भज गोविंदं भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।

वर्षा भदौरिया

राधे-राधे
मेरा नाम वर्षा भदौरिया है। मैं राजस्थान के सिरोही जिले में रहती हूँ। घर के सामने माता रानी का मंदिर होने के कारण घर में सुबह-शाम पूजन, आरती होती थी। मातारानी से बचपन से लगाव रहा, फिर भी मन में कुछ प्रश्न बचपन से उठते थे लेकिन जबाव कभी नहीं मिला; जैसे- मैं कौन हूँ और मेरा कौन है। फिर जीवन के उतार-चढ़ाव में मुझे डिप्रेशन नामक बीमारी हो गई। उसी दौरान मैंने श्री श्वेताभ भईया जी का फेसबुक पर एक लेख पढ़ा जिसे पढ़ने के बाद अंदर से हलचल सी मच गयी। उसके बाद मैंने एक के बाद एक कई लेख पढ़े। उसी समय मैंने भईया को फेसबुक पर फॉलो कर लिया। जून 2022 में फेसबुक पर ही भईया के व्हाट्सएप ग्रुप की लिंक प्राप्त हुई और बिना देरी किए मैं ‘अध्यात्म दर्शन’ समूह से जुड़ गई। मैं समूह में होने वाली प्रश्नोत्तरी में शामिल होती रही और वहाँ भईया जी हर छोटे से छोटे प्रश्न के उत्तर को भी बहुत सरल, सहज एवं व्यवहारिक तरीके से समझाते रहे । धीरे-धीरे पता चलने लगा कि अब तक हम भ्रम में थे कि हम भक्ति करते हैं। अभी तक हम लोग स्नान करके तिलक लगाना, रटकर दुर्गा चालीसा पढ़ने को भक्ति समझते थे। ‘अध्यात्म दर्शन’ समूह में मेरे सभी प्रश्नों के जवाब भईया जी के द्वारा मिले और दिमाग पर जमी हुई धूल भी झड़ गई।

एक दिन ग्रुप में प्रथम शिविर की घोषणा हुई और तभी मैंने अपना नाम दे दिया। शिविर में जाने से ज्यादा प्रसन्नता इस बात की थी कि शिविर वृंदावन में था, इस स्थान से मुझे विशेष प्रेम है। शिविर के पहले दिन ही विशेष अनुभव मिला जब गुरुजी सामने आए तो मन में शीतलता का अनुभव हुआ, ऐसा लगा कि यही तो हैं जिनको मैं ढूंढ रही थी। इसके अलावा जितने भी लोग शिविर में शामिल हुए सभी अपने ही लगे जो कब से बिछड़े हुए थे। वृंदावन शिविर में मैंने जाना कि भगवान डरने के लिए नहीं बल्कि प्रेम करने लिए हैं, उनसे प्रेम करना है मन से। मैं श्री श्वेताभ भईया जी की आभारी हूँ जिन्होंने मुझे जीवन का अर्थ समझाया है वरना उलझी रहती झूठे पाखंडों और आडंबरों में । गुरुवर ने कृपा की मुझ पर जो सही राह पर ले आए; जहाँ आप मंजिल भी दिखा रहे हैं और रास्ते भी सुगम बना रहे हैं।भौतिक प्रभाव यह हुआ है कि जो डिप्रेशन का इलाज चल रहा था, पहले शिविर के बाद उसकी एक भी टेबलेट नहीं ली मैंने क्योंकि मन में अब व्यर्थ विचार आने से रोकने का तरीका बता दिया भईया जी ने; जहाँ-जहाँ मन जाए वहाँ-वहाँ श्रीकृष्ण को खड़ा कर दीजिए, सब कुछ आसान हो जाएगा और हुआ भी है। अब तक मैं दो शिविर में शामिल हो चुकी हूँ और दोनों ही शिविर के अनुभव अद्भुत रहे हैं।
गुरुजी अपनी कृपा हम मूर्ख अज्ञानियों पर बनाए रखिएगा।